चित्तौड़गढ़। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) ने 69वीं राष्ट्रीय विद्यालय स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं से खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और तकनीकी कदम उठाया है। इस वर्ष से देशभर में आयोजित होने वाली विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य किया गया है, जिससे केवल पात्र और योग्य खिलाड़ियों की ही सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खिलाड़ी चयन से लेकर प्रतियोगिता संचालन तक की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। चित्तौड़गढ़ में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयी हैंडबॉल प्रतियोगिता के दौरान SGFI के ऑब्जर्वर एवं फील्ड ऑफिसर लियाक खान ने बताया कि फेडरेशन ने विगत वर्षों की तुलना में अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं।
लियाक खान के अनुसार, खेलों के संचालन में निष्पक्षता लाने और फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगाने के लिए तकनीक आधारित कई ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
पारदर्शिता के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
1. सालभर पहले तय होता है खेल कैलेंडर
SGFI द्वारा प्रतियोगिताओं का वार्षिक कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में ही घोषित कर दिया जाता है, जिससे खिलाड़ियों और आयोजकों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके।
2. निरंतर अपडेट होती आधिकारिक वेबसाइट
फेडरेशन की वेबसाइट को नियमित रूप से अपडेट किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और स्कूल प्रशासन को समय पर सटीक एवं प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो सके।
3. ऑनलाइन विजेता प्रमाण पत्र व्यवस्था
विजेता खिलाड़ियों के प्रमाण पत्र अब ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर बारकोड अंकित होता है। बारकोड स्कैन करते ही खिलाड़ी की पूरी जानकारी सामने आ जाती है, जिससे किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त हो जाती है।
भर्ती प्रक्रियाओं में मिलेगा वास्तविक खिलाड़ियों को लाभ
राष्ट्रीय स्तर की विद्यालयी प्रतियोगिताओं में विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में प्रमाण पत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ मिलता है। वहीं शारीरिक शिक्षक भर्ती में भी इन प्रतियोगिताओं में सहभागिता के लिए अतिरिक्त अंक निर्धारित हैं।
ऑब्जर्वर लियाक खान के अनुसार, फेडरेशन की इस नई व्यवस्था से खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत फर्जी अभ्यर्थियों के चयन पर प्रभावी रोक लगेगी और वास्तविक, मेहनती व प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनका हक मिल सकेगा।
SGFI की यह पहल न केवल विद्यालयी खेलों की साख को मजबूत कर रही है, बल्कि देश के भविष्य के खिलाड़ियों के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी मंच भी तैयार कर रही है।













