चित्तौड़गढ़। सीताराम मंदिर प्रांगण, हाथीकुंड मधुबन में नीलकंठ महादेव महोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के छठे दिन भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर व्यासपीठ की आरती विधायक चंद्रभान सिंह आक्या एवं आगाल परिवार द्वारा की गई।
कथा व्यास रामानंददास ने कहा कि सत्संग और भजन के माध्यम से जब हृदय की शुद्धि होती है, तभी उसमें भगवान श्रीराम का वास होता है। उन्होंने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सूर्यवंशी होने के कारण सदैव क्रियाशील रहे और स्वयं दिव्य गुणों को आचरण में उतारकर मानव जीवन को आदर्श मार्ग दिखाया।

उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि गुरु विश्वामित्र से दीक्षा प्राप्त कर भगवान राम ने आश्रम को राक्षसों से मुक्त कराया तथा रामरज से अहिल्या का उद्धार किया। उन्होंने अस्त्र और शस्त्र के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्त्र सिद्ध मंत्र होते हैं, जबकि शस्त्र प्रत्यक्ष हाथों से चलाए जाते हैं। जहां ज्ञान और वैराग्य होते हैं, वहीं भक्ति स्वतः प्रकट होती है। मनुष्य के लिए धन-वैभव, पुत्र-पत्नी से अधिक प्रिय उसकी आत्मा होती है।
सीताराम स्वयंवर का सजीव चित्रण करते हुए व्यासपीठ से बताया गया कि अहंकार और पाप का प्रतीक धनुष भगवान राम द्वारा गुरु विश्वामित्र के चरण स्पर्श के पश्चात हाथ लगाते ही चूर-चूर हो गया। धनुष टूटते ही विशाल जनसमूह ने सीताराम के जयकारे लगाए। भजन “झुक जाओ राम जी, सिया मारी छोटी” के साथ पुष्पवर्षा के बीच भगवान राम और माता सीता ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।
“थाली भर के लाई खिचड़ो”, “नाचे नंदलाल नचावे” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर मंत्रमुग्ध अवस्था में नृत्य करते नजर आए।

कथा समापन पर व्यासपीठ की आरती पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत द्वारा संपन्न कराई गई।
कथा श्रवण के दौरान मनोहर सिंह शक्तावत, नीरज सुखवाल, सुधीर मेहता, दिनेश मेनारिया, योगेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता, बलवंत कोठारी सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।













