स्वदेशी उत्पादों को सशक्त करने का संकल्प, स्वदेशी व्यापार विस्तार पर हुआ विमर्श मेला, विद्यार्थियों में दिख रहा उत्सा

चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय स्वदेशी मेले के पाँचवें दिन स्वदेशी व्यापार को सशक्त बनाने और उसके विस्तार को लेकर उत्साहपूर्ण गतिविधियाँ देखने को मिलीं। मेले में उपस्थित स्टॉल संचालकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार, बिक्री बढ़ाने तथा दीर्घकालीन व्यापारिक संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

इस अवसर पर जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. रमेश चंद धाकड़ ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने विशेष रूप से राजीविका एवं वन-धन स्टॉल का अवलोकन कर स्टॉल संचालकों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया। राजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित फूड स्टॉल का भी निरीक्षण किया गया, जहाँ खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं प्रस्तुतीकरण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। राजीविका मैनेजर (फाइनेंस) द्वारा भी फूड स्टॉल का निरीक्षण कर सुझाव प्रदान किए गए।

मेले के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में स्वदेशी वस्तुओं एवं स्वदेशी तेल के महत्व और उनके उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान अरविंद एवं जिला परियोजना प्रबंधक द्वारा बाहर से पधारे अतिथियों का स्वागत किया गया तथा उन्हें जी.आई. टैग प्राप्त स्वदेशी उत्पादों की विशेषताओं से अवगत कराया गया।

कार्यशाला में राजीविका से जुड़ी महिलाओं को खजूर एवं लकड़ी से निर्मित उत्पादों की जानकारी दी गई। वहीं वे. गोपाल ने पलाश के पत्तों से पत्तल एवं दोना निर्माण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए इस क्षेत्र में फैक्ट्री स्थापना की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में कृषि अधिकारियों ने महिलाओं को ड्रोन तकनीक से खेती, जैविक एवं मिश्रित खेती, स्ट्रॉबेरी उत्पादन तथा ऑर्गेनिक उत्पादों की मार्केटिंग से संबंधित जानकारी दी। इन गतिविधियों से राजीविका से जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिला।

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