सांसारिक मोह-माया के कारण सुखदेव 12 वर्ष बाद माँ के गर्भ से बाहर आए : आचार्य हरिमंगल

चित्तौड़गढ़। सैगवा हाउसिंग बोर्ड स्थित चमत्कारिक सांवरिया जी मंदिर के समीप सिद्धिविनायक वाटिका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन व्यास पीठ एवं भागवत पोथी की पूजा घनश्याम सिंह एवं राकेश माहेश्वरी द्वारा की गई।

कथा व्यास पीठ से आचार्य हरिमंगल ने बताया कि जब स्वयं ईश्वर ने सुखदेव जी से कहा कि वे माँ के गर्भ से बाहर आएं और उन्हें सांसारिक मोह-माया नहीं बांधेगी, तब 12 वर्षों के उपरांत सुखदेव जी गर्भ से बाहर आए। उन्होंने कहा कि जहाँ दान, दया और भक्ति से परिपूर्ण शुद्ध हृदय होता है, वहीं ईश्वर अवतार लेते हैं।

आचार्य श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि नदी मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधों और पशुओं को बिना भेदभाव अपने जल से तृप्त करती है, इसलिए उसका जल मीठा होता है, जबकि समुद्र केवल संग्रह करता है, इसलिए उसका जल खारा होता है। इसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में सदैव दान-पुण्य करना चाहिए और आवश्यकता से अधिक धन का संग्रह नहीं करना चाहिए।

कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना वध एवं कालिया मर्दन के रोचक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। साथ ही धीरे-धीरे झूला, सांवरिया के जाणो, राधा रानी जैसे भजनों पर श्रोता भावविभोर होकर झूम उठे और नृत्य किया।

कथा में नरेंद्र सिंह शक्तावत, सत्यनारायण सेन, सौरभ शर्मा, गोवर्धन सिंह, गिरिराज वर्मा सहित सैकड़ों सैगवा हाउसिंग बोर्ड निवासी उपस्थित रहे।

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