विधानसभा में युवा वक्ता रह चुके जिले के निवासी ऋषभ चतुर्वेदी ने युवा संसद में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका का निर्वाहन करते हुए प्रतिनिधित्व किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार , राजस्थान विश्वविद्यालय एवं मंच मिनिस्ट्री संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर के मुख्य काउंसिल हॉल में देश की बात – युवाओं के साथ थीम पर दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा संसद का आयोजन हुआ। देश के सभी राज्यों से 450 से अधिक आवेदन आए जिनमें से स्क्रीनिंग राउन्ड के पश्चात 13 विभिन्न राज्यों के 152 युवा चयनित हुए ।

राष्ट्रीय युवा संसद में एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं वक्फ संशोधन विधेयक को पेश कर संसदीय चर्चा एवं वाद विवाद किया।
जहां पहले दिन के सत्र में एक राष्ट्र,एक चुनाव विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष के द्वारा अनुच्छेद 356 के संभावित दुरुपयोग के सन्दर्भ में प्रश्न पूछे जाने पर चतुर्वेदी ने आँकड़े स्पष्ट करते हुए कहा की देश में अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कुल 132 बार हुआ जिसमें से अनुमानित 93 बार उन्हीं की पार्टी के शासन काल के दौरान किया गया। चतुर्वेदी ने सत्ता पक्ष की ओर से स्पष्ट करते हुए कहा की मौजूदा सरकार चुनी हुई सरकारों को अकारण गिराने की मानसिकता बिल्कुल भी नहीं रखती है और देश की जनता के फैसलों को सदैव सर्वोच्च मानती है।चुनावों में होने वाले बढ़ते हुए व्यय पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक राष्ट्र,एक चुनाव यदि लागू होता है तो धन के अपव्यय को जो कि 1951-52 के लोक सभा चुनाव में खर्च हुए 10.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 1,35,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है उसको नियंत्रित कर जनता के धन को और बेहतर रूप से देश के हितों में लगाया जा सकता है।
राम नाथ कोविंद कमेटी 2023 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया की यदि भारत इस चुनावी प्रक्रिया को अपनाता है तो गत वर्ष भारत की जि.डी.पी में अनुमानित 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। वहीँ पॉलिसी पेरालाईसिस का मुद्दा उठाते हुए आंकड़े पेश करते हुए बताया की बार-बार आचार संहिता लागू होने के कारण 5 वर्ष में 800 सुशासन दिनों का नुकसान देश को हुआ है, ऐसे में चुनाव एक साथ होने पर जनता के हितों के लिए और ज्यादा सुचारू एवं प्रभावी रूप से सरकार काम कर पाएगी और देश की उन्नती गतिमान होगी। राष्ट्र की उन्नती की बात होते ही सदन भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
वही दूसरे दिन के सत्र में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा करते हुए उन्होंने विपक्ष के कई नेताओं को जवाबदेही और सुधार को लेकर अनेक प्रश्नों से गहर लिया, दागे हुए प्रश्नों ने युवा संसद के अन्दर विपक्ष को निरुत्तर कर दिया और तथ्यों एवं आँकड़ों की बात करते ही विपक्ष काफी असहेज हो गया, जिसके चलते पूरा सदन चतुर्वेदी के लिए संसदीय थापों से गुंजायमान हो गया।
पर्यावरण और अरावली के मुद्दे को लेकर सवाल उठने पर उन्होंने कड़े शब्दों में एतिहासिक सन्दर्भ देते हुए कहा कि हम राजस्थान की उस भूमि पर खड़ें हैं जहाँ प्रकृति और खेजड़ी के संरक्षण के लिए यहाँ के लोगों ने अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए थे और अरावली हमारे लिए केवल पहाडियाँ नहीं है बल्कि हमारी एतिहासिक धरोहर और पर्यावरणीय ढाल भी हैं तो ऐसे में यह बात तय है कि हम अरावली के संरक्षण करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
गौरतलब है कि तमिलनाडु के महामहिम राज्यपाल द्वारा पूर्व में सम्मानित ऋषभ चतुर्वेदी ने 75 से अधिक बहुराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राजकीय एवं अकादमिक कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी निभाकर राष्ट्रीय आयामों तक प्रतिनिधित्व कर युवाओं के मध्य राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना को पहुंचाने का काम किया है ।
चतुर्वेदी ने कहा इस तरह के आयोजनों में युवाओं को आगे बढ़कर भाग लेना चाहिए क्योंकि इनसे जहां एक ओर बुद्धिमत्ता का स्तर बढ़ता है बल्कि साथ ही उनकी राजनैतिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ का विकास भी होता है वहीं दूसरी ओर यह गतिविधियाँ युवाओं के मध्य देश के प्रति कर्त्तव्य निर्वाहन का अलख जगाने का कार्य भी करतीं हैं जो कि उनके द्वारा राष्ट्रहितों को बेहतर रूप से सुनिश्चित करने में सहायक साबित हो सकता है ।













