चित्तौड़गढ़। भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करते हुए मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ और ईरान कल्चर हाउस, नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के माध्यम से दोनों संस्थान अकादमिक, सांस्कृतिक एवं शोध सहयोग को व्यापक रूप से बढ़ावा देंगे।
एमओयू के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में ईरानी अध्ययन, फारसी भाषा एवं साहित्य, ईरानी दर्शन एवं सूफी परंपरा, कला एवं हस्तशिल्प, समकालीन आर्थिक अध्ययन तथा संयुक्त शोध परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही मेवाड़ विश्वविद्यालय में इंडो-ईरानियन स्टडीज़ सेंटर की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।

समझौते के अनुसार ईरान कल्चर हाउस द्वारा मेवाड़ विश्वविद्यालय में फारसी भाषा केंद्र एवं एक लघु अकादमिक केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहां छात्रों एवं शोधार्थियों को ईरान में अध्ययन, शोध, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक भूमि एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराई जाएगी।
इस शैक्षणिक सहयोग के अंतर्गत फारसी भाषा की कक्षाएं ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आयोजित की जाएंगी। साथ ही अल्पकालिक शैक्षणिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी आयोजित करने के साथ-साथ दोनों संस्थानों के बीच शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
एमओयू में संयुक्त रूप से “इंडो-ईरानियन स्टडीज़ क्वार्टरली जर्नल” के प्रकाशन का भी प्रावधान है, जिसके मुद्रण एवं प्रकाशन में ईरान कल्चर हाउस सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष दो भारतीय शोधार्थियों को ईरान में शोध हेतु छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
इस अवसर पर ईरान कल्चर हाउस, नई दिल्ली की ओर से सांस्कृतिक परामर्शदाता डॉ. फरीदोद्दीन फरीदअसर तथा मेवाड़ विश्वविद्यालय की ओर से चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने इस पहल को भारत-ईरान के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।













